रुचि के स्थान

मंदार हिल:-

यह पहाड़ी भागलपुर शहर से ४८ किलोमीटर की दूरी पर है जो वर्तमान में बांका जिला में स्थित है| इसकी उचाई ८०० फीट है| इसके सम्बन्ध में मान्यता है कि इसी पहाड़ी का प्रयोग समुद्र मंथन में किया गया था| किविदंतियों के अनुसार आज भी इस पहाड़ी के चरों और शेषनाग के चिन्ह को देखा जा सकता है| कालिदास के कुमार संभवम में पहाड़ी पर भगवान् विष्णु के पदचिन्हों के बारे में बताया गया गया है| इस पहाड़ी पर हिन्दू देवी देवताओं का भी मंदिर स्थित है| यह भी माना जाता है की जैन के १२वे तिर्थंकर ने इस पहाड़ी पर निर्वाण प्राप्त किया था| इनके साथ हि मंदार हिल की सबसे बड़ी विशेषता इसकी चोटी पर स्थित झील है जिसे देखने के लिए दूर-दूर से पर्यटक आते है| पहाड़ी के ठीक नीचे पापहरणी तालाब है, इस तालाब के बीच में भगवान विष्णु का मंदिर दृश्य को रोमांचक बनता है| यहाँ जाने के लिए भागलपुर से रेल और बस दोनों की सुबिधा उपलब्ध है|

विक्रमशिला विश्वविद्यालय:-

विश्व प्रसिद्द विक्रमशिला विश्वविद्यालय भागलपुर से ३८ किलोमीटर दूर अंतीचक गाँव के पास है| विक्रमशिला विश्वविद्यालय नालंदा के समकक्ष माना जाता था| इसका निर्माण पाल वंश के शासक धर्मपाल (७७०-८१० ईशा पूर्व) ने करवाया था| धर्मपाल ने यहाँ की दो चीजों से प्रभावित होकर इसका निर्माण कराया था| एक तो यह लोकप्रिय तांत्रिक केंद्र था जो कोसी और गंगा से घिरा हुआ था दूसरा यह स्थान उत्तरवाहिनी गंगा के समीप होने के कारण श्रधालुओं का केंद्र बना रहता है| यहाँ माँ काली और भगवान् शिव का मंदिर स्थित है|

श्री चम्पापुर दिगंबर जैन सिद्ध क्षेत्र:-

श्री चम्पापुर दिगंबर जैन सिद्ध क्षेत्र एक मुक्ति स्थल के रूप में प्रसिद्द है| यह काफी प्राचीन और ऐतिहासिक तीर्थ स्थल है| श्री चम्पापुर दिगंबर जैन सिद्ध क्षेत्र भागलपुर शहर के पश्चिमी किनारे पर अवस्थित नाथनगर में है| सड़क से भागलपुर रेलवे स्टेशन से ३.५ किलोमीटर एवं बिहार की राजधानी पटना से २७० किलोमीटर दूर है| सम्पूर्ण विश्व में चम्पापुर ही जैन धर्मावलंबियों के लिए एक मात्र ‘पंच कल्याणक’ क्षेत्र है| पंच कल्याण से तात्पर्य १२ वे तीर्थंकर भगवान वासुपूज्य (प्रथम सन्यासी संत) के (१) गर्भधारण (२) जन्म (३) तप(तपस्या) (४) ज्ञान प्राप्ति और (५) मोक्ष से सम्बंधित है|

तिलका मांझी:-

तिलका मांझी पहाड़िया/ आदिवासी समुदाय के पहले नेता थे, जिन्होंने ब्रिटिश शाशन का सन १७८० में सशस्त्र विरोध किया था| इन्हे पकड़ने के लिए ब्रिटिश फ़ौज ने कई सप्ताह तक तिलपुर जंगल को चारों और से घेर रखा था| अंततः तिलका मांझी सन १७८४ में फ़ौज की पकड़ में आये| इन्हें घोड़े की पूँछ में बाँधकर कलेक्टर आवास तक घसीटकर लाया गया था| और अंततः इन्हें एक चौराहे पर बरगद वृक्ष में फांसी पर लटका दिया गया था| वह चौराहा आज तिलका मांझी चौक के नाम से प्रख्यात है और उस चौराहे पर तिलका मांझी की प्रतिमा स्थापित है जो की ठीक पुलिस अधीक्षक आवास के निकट है| तिलका मांझी के सम्मान में ही भागलपुर अवस्थित विश्वविद्यालय को तिलका मांझी भागलपुर विश्वविद्यालय के नाम से जाना जाता है|

महर्षि मेही आश्रम:-

इस आश्रम के संस्थापक सद्गुरु महर्षि मेही परमहंस जी महाराज थे| महर्षि मेही परमहंस जी महाराज को कबीर, नानक जैसे संतों की श्रृंखला की एक कड़ी के रूप में लोग श्रधन्वत सम्मान देते है| इन्हें ईश्वर की रूप में भी पूजा जाता है| श्री परमहंस जी महाराज को इश्वर से साक्षात्कार प्राप्त था| इन्हें वे सभी दिव्य शक्तियां प्राप्त थी जो एक संत के लिए निर्धारित मानदंडों के लिए आवश्यक है|यह आश्रम गंगा तट पर भागलपुर शहर के पूर्वी चोर पर अवस्थित है| इस आश्रम प्रांगण में ही एक प्राचीन मानव निर्मित गुफा है जिसे महाभारत काल से भी जोड़कर देखा जाता है| यह पर्यटकों के लिए मुक्य आकर्षण का केंद्र है|